सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी होने का दावा और उसका खुरदुरा चिंतन

ईश्‍वर ने पृथ्‍वी समेत पूरे ब्रह्माण्‍ड को बनाया (मनुष्‍य पूरे विश्वास से हजारों वर्षों से जम कर ऐसा सोचता रहा है) इस पर जम कर मोटी मोटी किताबें भी लिखी गई है। मनुष्‍य अजब-गजब कमाल का प्राणी है। वह ब्रह्मांड के खरबों गैलेक्सी और एक-एक गैलेक्सी में समाए खरबों तारे और उससे भी अधिक ग्रहोंउपग्रहों और क्षुद्रग्रहों को बनाने वाला को पूरी तरह जानने समझने का दावा करता है। वह ईश्वरपरमेश्वर को भूमिहीनआवासहीनसहज में खुश होने वाला और आदमी के कुकर्मों को कुछ पैसे और क्रंदन भरा प्रार्थना सुनकर क्षमा करने वाला रिश्वतखोर भी समझता है।  
आदमी के पास कल्पना में विचरण करने वाला एक खोपड़ी है। उसकी  परिकल्पना आकाश में लगातार उड़ती रहती है। वह ईश्वर के मूर्ति को अपने कदकाठी के अनुसार बनाता है उसके चेहरे को आदमी का बना कर फिल्मी हीरो हीरोइनों की तरह तीखे नक्श नैन वाला भी बनाता है। उसका रंग गोरा या काला या सांवला बना कर अपने विश्वास और कल्पना को थपथपाता है।
चुटकलानुमा सोच की बानगी देखिए कि आदमी कहता है ब्रह्मांड में सिर्फ एक ही परम शक्तिशालीपरम सृजनशील परमेश्वर हैबाकी सब उसके अधीन के प्रजानुमा गुलाम प्राणी हैं। वह उस परम शक्तिशालीपरम सृजनशील आदमी (?) को पूरी तरह जाननेपहचानने का दावा भी करता है।
चिड़ियोंतितलियों और शेरों को आदमी के इस विश्वास और कल्पना के बारे कुछ इल्म है या नहींअभी तक पता नहीं चला है।
हँसते हँसते पेट में बल पड़ जाते हैं जब आदमी कहता है कि उसे उस परम सृजनशील के बारे सभी कुछ पता है मसलन उसने कब जन्म लियाकैसे जन्म लियाबचपन में क्या करता थाभरी जवानी में क्या-क्या गुल खिलायाबुढ़ापे में क्या-क्या मजेदार क्रिया करम किया ?? आदमी तो यह भी कहता है कि परमेश्वर स्वर्ग में क्या करता हैकैसे उठता है बैठता हैदाएँ -बाएँ किनके साथ रहता है ?? सुतीरेश्मी या कृत्रिम रेशे से बुने गए कपड़े पहनता है या ...


आदमी का सोच कितना बालसुलभ हैबुद्धिमत्ता का स्तर क्या है ?? कल्पना की उड़ान तो खैर ...
आदमी नामक क्षणभंगुर प्राणी अजर अमर ब्रह्माण्ड के निर्माता को दिल और दिमाग से पूर्ण भूमिहीनआवासहीन समझता है और अपने प्यार उढ़ेलते हुए परमेश्वर के लिए खूब धन व्यय करके अपने पड़ोस में सुंदर इमारत का निर्माण करता है। ईट सीमेंट और पत्थरों से बने इमारतों को खूब सजाता है और उसका मेकअप करता है। वह  बहुमूल्य पत्थर और कपड़ों से इमारत को सजा कर उस इमारत को धनवान बनाता है और उस परमेश्वर को वहाँ विराजमान करता है। आदमी इस कार्य को परम बुद्धिमानी का काम कहता है।
उसे खुश करने के लिए फलफूल पकवान भी रखता है। अधिक खूश करनेभक्ति दिखाने के लिए डांस भी करता है। कई तो उसके खुश और स्वस्थ रहनेबीमार होने की बातें भी जानते हैं और ब्रह्मांड के निर्माता को इंजेक्शन देनेखाना-पीना देने का जतन भी करते हैं।
सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी होने का दावा करने वाला आदमी ईश्वर का कई कई पेट नाम या उपनाम भी रखता है। ब्राह्मंड के स्वामी लेकिन बेघर बार  ईश्वर के लिए ठाठ बाट का घर बना कर ईश्वर पर एहसान करने का घमंड भी करता है। अहा! ये पैसे वाला दयावान आदमी न होता तो ईश्वर को किसी सड़क के किनारे खुले आसमान तले बेनाम और बेघर होकर रात (दिन)  बिताना पड़ता। बेचारेसड़क के प्राणी को कोई पूछता है भला!!
सबसे दिलचस्‍प बात तो यह है कि वह ईश्‍वर को इन घरों में बंद करके बड़े बड़े ताला भ्‍ाी लगाता है और सुरक्षा गार्ड भी तैनात करता है। क्या ईश्वर का बंदीगृह से निकल कर कहीं भाग जाने की आशंका रहती है?
आदमी की भक्ति इतना कि इन ईमारतों में आने पर वह अपनी कुल मुद्रा में से "अत्यंत थोड़े" से मुद्रा बोले तो रूपये पैसे को ईश्वर को देता है। आदमी रूपया पैसा न दे तो बेचारा ईश्वर का क्या हाल होगा ?? जरूर गरीब हो जाएगा !!
गरीबी में दिन गुजारना किसे कहते है !!!! इसका दूसरा मतलब है सब चंदे या दान दे दे कर उन्हें धनवान बनाते हैं। इन पैसों से परमेश्वर जरूर किसी गैलेक्सी में खाने पीने का सामान खरीदते होंगे।
ये ईश्वर का घर भी अलग-अलग होता है। औने-पौने छोटे मोटे सड़क किनारे के पर्मेश्वरालय का परम ईश्वर दुबला पतलाकमजोर और मरियल सा होता हैइसलिए आदमी इन सड़क छाप पर्मेश्वरालय में जाने से कतराते हैं। वे तो दूर देश के बड़ा और शानदार प्रसिद्ध ईश्वरालय में जाते हैं या किसी कठिन पहाड़ की चढ़ाई के उस पार रहने वाले ईश्वर के पास जाना पसंद करते हैं। शायद वहाँ का ईश्वर ज्यादा मोटा ताजा शक्तिशाली होता है। वहाँ की भीड़ बताता है कि वहाँ का ईश्वर कितना बलशाली है। धर्म यात्रा में मोटी रकम खर्च करने पर ईश्वर बहुत खुश होता है। स्वर्ग में इससे पूर्व आरक्षण मिल जाता है।
आदमी कहता है पूरे ब्राह्मंड में सिर्फ और सिर्फ एक ही ईश्वर है। लेकिन क्यों कुछ ईश्वरालय मरियल सा होता है और कुछ बलशाली ?? कुछ का हाल खास्ताहाल तो कुछ 27 मंजिली अंटिला जैसा ?? चक्करघिन्नी की बात को कौन समझाए !!!
ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ सृष्टि ''बुद्धिमान'' प्राणी ''मनुष्‍य प्राणीआदमी का काम क्या है कमजोर ईश्वर का रखवालाबेघरबार ईश्वर के लिए मकान बनाने वाला, महान मालिक आदमी। पर्मेश्वरालय में परमेश्वर को ताला जड़कर बंदी बनाने वाला !!
खुरदुरा चिंतन चल रहा है। उधर कुछ बच्चे पापा-मम्मी का खेल बहुत गंभीरता से खेल रहे हैं। इधर आँखें मीचें सोच चिंतन में व्यस्त हैं।