अपनी अज्ञानता को ज्ञान से सुलझाईए, चमत्कार मत बनाईये

हम 21वीं सदी में सफ़र कर रहे हैं जहाँ विज्ञान प्राकृतिक रहस्यों के बारे में रोज नए खुलासे करते जा रहा है। लेकिन फिर भी कई बार हमारा सामना कुछ ऐसी प्राकृतिक घटनाओं से होता है जो हमें बरबस सोचने पर मजबूर कर देती हैं। अमेरिका के कैलेफोर्निया प्रान्त के डेथ वैली नेशनल पार्क में स्थित एक सूखी झील जो रेसट्रैक प्लाया के नाम से प्रसिद्द है में एक ऐसी ही आश्चर्यजनक घटना घट रही थी जिसने कई दशकों से लोगों को सोचने पर मजबूर किया हुआ था।

पहाड़ों की तलहटी में स्थित 4.5 किलोमीटर लम्बी और 2.1 किलोमीटर चौड़ी इस झील को इसकी सपाट सतह के कारण जाना जाता है जो की झील के सूखने के कारण इसके तल पर जमा बारीक़ अवक्षेप से बनी है। यह इतनी ज्यादा सपाट है कि इसके उत्तरी और दक्षिणी भाग के लेवल में मात्र 3.8 सेंटीमीटर का फर्क है। सदियों से इस सूखी झील के तल पर एक अजीबो-गरीब घटना घट रही है। झील की सतह पर मौजूद कुछ पत्थर एक अज्ञात ठिकाने की ओर अनवरत यात्रा कर रहे हैं। 




हालाँकि इन पत्थरों को किसी ने चलते नहीं देखा लेकिन ये हर साल अपने स्थान से कुछ मीटर तक आगे खिसक जाते हैं। पार्श्व में इनके खिसकने से बना एक लम्बा ट्रैक मौजूद है जो इनकी अनवरत यात्रा की गवाही देता प्रतीत होता है। चूँकि यह सूखी झील एक निर्जन स्थान पर स्थित है जहाँ दूर दूर तक कोई मानव बस्ती नहीं है और न ही कोई जंगली जीव ही यहाँ मौजूद है। इन पत्थरों का वजन भी कुछ किलोग्राम से लेकर 300 किलोग्राम तक है। तो आखिर वह कौन सी शक्ति है जो इन भारीभरकम पत्थरों को अपने स्थान से लगातार सरका रही है?

सेलिंग स्टोन के नाम से प्रसिद्ध यह फिनोमिना बहुत समय से लोगों के लिए एक पहेली बना हुआ था। इस रहस्यपूर्ण घटना की व्याख्या में कई तर्क दिए गए। जैसे किसी ने कहा कि यह शायद पत्थरों पर जमने वाली फिसलनी काई की परत के कारण हो रहा है। तो कुछ ने कहा की शायद गर्मियों में यहाँ उठने वाले अंधड़ इस घटना के लिए जिम्मेदार हैं। 
यहाँ तक की चुम्बकीय क्षेत्र से लेकर परग्रहीयों तक के तर्क दिए गए, लेकिन इन तर्कों में से कोई भी तर्क जाँच में इस घटना की व्याख्या के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। कमाल की बात तो ये थी की इन पत्थरों की गति भी एक जैसी और एक ही दिशा में नहीं थी। कोई पत्थर दायीं ओर गति कर रहा था तो कोई बाएं। और तो और कोई पत्थर सीधा चलते हुए कर्व बनाकर दांयें अथवा बांयें भी मुड़ जाता था। इसने खोजकर्ताओं को और भी ज्यादा चकरा रखा था।
आखिरकार 2011 में कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी की एक संस्था के खोजकर्ताओं ने इस रहस्य पर से पर्दा उठाने की ठानी। उन्होंने पत्थरों की गति को जीपीएस से ट्रैक करने का तय किया। चूँकि झील में जो पत्थर थे उन पर जीपीएस लगाने की अनुमति उन्हें नेशनल पार्क से नहीं मिल सकती थी इसलिए वे उसी आकार के पत्थर अपने साथ ले गए जिन पर उन्होंने जीपीएस डिवाइस फिट कर दिया। अब इन पत्थरों की गति पर आसानी से नजर रखी जा सकती थी। अब आसानी से परिशुद्धता से मापा जा सकता था कि पत्थरों में कब और कितनी गति हुयी। आख़िरकार दो साल तक परिक्षण करने के बाद वे इस रहस्य से पर्दा उठाने में सफल रहे।

उन्होंने पाया की पत्थरों में गति सर्दियों के मौसम में उस दिन होती है जब उससे पिछले दिन बारिश पड़ी हो जिससे झील के तल पर कुछ पानी जमा हो गया हो। यह पानी सर्द रात के दौरान पत्थर के नीचे ठोस बर्फ की एक पतली तह के रूप में जम जाता था। सुबह जब सूर्य की गर्मी में बर्फ पिघलती थी उससे पत्थर और झील के ठोस तल के बीच एक घर्षण रहित सतह बन जाती थी और घाटी में चलने वाली हवा के दवाब से वह पत्थर अपने स्थान से धीरे धीरे आगे खिसकने लगता था। यह गति इतनी धीमी थी कि इसे दूर से देखकर महसूस नहीं किया जा सकता था।

..तो इस तरह लम्बे समय से रहस्य बनी इस घटना के रहस्य से पर्दा उठ ही गया। इससे हमें पता चलता है कि कोई घटना चाहे कितनी भी रहस्पूर्ण हो उसके पीछे कोई न कोई समझने योग्य जिम्मेदार कारण जरुर होता है। हमें वह घटना बस इसलिए रहस्यपूर्ण लगती है क्योंकि हम उसके लिए जिम्मेदार कारण को नहीं समझ पाते।