अविवाहित बेरोजगार युवकों की व्यथा कथा

बेरोजगारी के कारण गाँव क्या और शहर क्या अच्छे और ईमानदार लड़कों की शादी नही हो पा रही है। उनका कसूर बस इतना है कि गाँव वाले युवकों के पास पुस्तैनी ज़मीन कम हो गई जनसंख्या बढ़ने के कारण और शहरों में रहने वालों के पास नौकरी अथवा व्यवसाय के बिना शादी होना मुश्किल हो रहा है। उम्र है कि लगातार बढ़ता जा रहा है। जो लड़की हैं वे ज्यादातर गांवों में जमीन वाले खानदानी अमीर लोगों के घर ब्याह दी जा रही हैं और शहरों में नौकरी-व्यवसाय वालों के घर के लड़कों के साथ। हम हर साल शादी की आस में ताकते रह जा रहे हैं।




शहर जाकर कुछ काम धाम मिल भी जा रहा है तो वहां न रहने का ढ़ंग का ठिकाना है और न ही पगार इतनी है। बिना पढ़ी-लिखी लड़की से शादी करना भी अच्छा नहीं होगा। नहीं तो पढ़े लिखे होने के बाद भी अनपढ़ लड़की के साथ शादी का ताना रिश्ते-मोहल्ले वालों से सुनना पड़ेगा जीवन भर। कहेंगे कि कहते थे कि इतना पढाई मत करो, कौन देगा बेटी? तब तो तौहीन लगता था लोगों का ऐसा कहना। तब सोचते थे कि पढ़े लिखे को भला क्या दिक्कत? नौकरी नहीं तो कोई कुछ मास्टरी या लिखा पढ़ी का काम मिल ही जायेगा।

किसको पता था नौकरी की इतनी मारामारी होगी? शादी के लिए जमीन और नौकरी योग्यता बन जायेंगे। पढाई लिखाई को कोई पूछेगा भी नहीं। शहरों में रहने वाले युवकों की तरह न अंग्रेजी ही सीख पाई ठीक से और न ही कंप्यूटर। सच कहें, तो लगता है जीवन ही व्यर्थ हो गया। न ईधर के रहे, न उधर के। ऊपर से जवानी पहले तो कंट्रोल नहीं हो रही थी, अब अपना हाथ जगन्नाथ वाला हाल है। करें तो करें क्या?

अब लगता है कि लड़की का बाप कैसा महान प्राणी होता है, जो अपनी पाली-पोसी बेटी को किसी अनजान लडके साथ व्याह देता है। कई बाप दहेज़ भी देते हैं, बिना मांगे। लड़की के बाप के लिए भी लड़का वही योग्य होता है, जिसके पास धन अथवा नौकरी है। उसी को दहेज़ भी मिलती है, और पूछ भी होती है। एक हम हैं, जो मुफ्त में, बिना दहेज़ के शादी करने के लिए तैयार बैठे हैं, पर कोई हमारी तरफ ताकता तक नहीं। हम पढ़े लिखे हैं, उनके पास दौलत है, क्या ऐसा नहीं हो सकता था कि हमारे जैसे लडके के साथ अपनी बेटी ब्याह देते और बेटी के लिए कई व्यवसाय कर देते। दोनों व्याहता युगल एक अच्छी ज़िन्दगी गुजारते!

ऐसे में मेरा एक अनुरोध है सभी बेटी के माँ-बाप से, अगर आपकी बेटी है और आप उसका विवाह करना चाहते हैं, तो लडके की योग्यता देखें। उसका धन, जमीन अथवा नौकरी नहीं। नहीं तो मेरे जैसे धनहीन, जमीन विहीन और नौकरी के बिना युवकों का क्या होगा? आपके पास धन तो है ही, आप क्यों नहीं ऐसे बेरोजगार युवकों को अपना दामाद बनाते और आर्थिक मदद कर उनको व्यवसाय करने में मदद करते?