जानें 3 महीनें में पी-एच.डी. थीसिस कैसे लिखें?

पी-एच.डी. यानि ‘डॉक्टर ऑफ़ फिलोसोफी’ करना अकेडमिक कैरियर के लिहाज से एक ऐसी जररत है, जिसे किये बिना आप ऊँची छलांग नहीं लगा सकते। पी-एच.डी. के बाद रिसर्च के क्षेत्र में कई दरवाजे खुलते हैं। मसलन आप रिसर्च असिस्टेंट हो सकते हो। असिस्टेंट प्रोफेसर और आगे प्रोफेसर बन सकते हो, जो न केवल अच्छी सैलरी वाला जॉब है, बल्कि इस क्षेत्र में मान-सम्मान भी कम नहीं मिलता। खुद के नाम के पहले प्रोफेसर लगना या कमसे कम डॉ. लगना किसे पसंद नहीं होगा? 

लेकिन पी-एच.डी. करना इतना आसान भी नहीं है। पहले तो यूनिवर्सिटीज में पी-एच.डी. की सीट इतनी कम होती है और एडमिशन मिलना मुश्किल होता है और ज्यादातर लोग पहले ही हार जाते हैं। एडमिशन अगर मिल जाय तो उम्र के इस दौर में आर्थिक बाधाएं आ खड़ी होती हैं। अगर कहीं घर वाले पढाई का खर्च देने को राजी भी हो जायें अथवा कहीं से कोई स्कालरशिप/ फ़ेलोशिप भी मिल जाये, तब भी पी-एच.डी. हो ही जायेगा, यह जरुरी नहीं है। पी-एच.डी. अवार्ड होने के लिए आपको अपने चयनित टॉपिक पर एक थीसिस लिखनी होती है। ज्यादातर लोगों को पी-एच.डी. करने के दौरान ठीक से यह पता ही नहीं होता कि करना क्या है।

तस्वीर ट्विटर से साभार

हालाँकि जैसे ही आपका टॉपिक रजिस्टर होता है, तब से ही सुपरवाइजर बस पूछते रहते हैं कि कितना चैप्टर हुआ, कितना पेज लिखे, जल्दी क्यों नहीं लिखते आदि। वास्तव में ऐसे पूछा जाना कोई मदद नहीं करता, बल्कि उलटे मानसिक दबाव का कारण मात्र बनता है। समय जितना बीतता जाता है, शोधार्थी पर दबाव उतना ही बढ़ता जाता है। ऊपर से पी-एच.डी. पूरा नहीं हो पाने का डर भी बढ़ने लगता है। समय बीतते-बीतते आखिरी साल आ जाता है और फिर समझ नहीं आता कि करें तो करें क्या? मतलब दिमाग एकदम जाम हो जाता है और फ्रस्ट्रेशन का लेबल एकदम हाई।

आखिरी साल में और कई लोग आखिरी छमाही तक थीसिस पूरा नहीं कर पाते। यहाँ पर उन्हीं शोधार्थियों को ध्यान में रख कर कुछ टिप्स बताये गए हैं। यदि आप उनका सही से पालन करेंगे, तो न केवल उसे तेजी से पूरा कर सकते हैं, बल्कि हो सकता है आपमें से कोई ऐसा भी हो, जो इसे मात्र तीन महीनें में भी पूरा कर सकते हैं। ऐसे ही 
27 टिप्स यहाँ दिए जा रहे हैंइस उम्मीद के साथ कि ये टिप्स आपके थीसिस को पूरा करने में बहुत मददगार साबित होंगे। फिर आईये शुरू करते हैं।

#टिप्स 1
जो रिसर्च का टॉपिक है, उसपर देख लें की आपके पास पर्याप्त मात्रा में सामग्री उपलब्ध है। बीच में लिखने के दौरान सामग्री ढूंढने से सारी प्लानिंग ख़राब हो जाएगी।

#टिप्स 2
पी-एच.डी. के प्रत्येक चैप्टर को कई सब-चैप्टर में बाँट लें। सब-चैप्टर को भी जरुरत के हिसाब से कुछ टुकड़ों में बाँट लें और उसके बारे में कॉन्सेप्ट अथवा परिचय कर लें। उसे अपनी समझ के हिसाब से लिख लें।

#टिप्स 3
यदि रिसर्च से सम्बंधित सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं मिले, तो अपनी समझ से जो भी समझ में आये उसे लिखें। कोई पुस्तक अथवा इंटरनेट पर कोई सम्बंधित एकाध लेख या पेपर मिले, उसे कॉपी पेस्ट कर लें। फिर उसकी भाषा बदल दें। उसके बाद अपनी समझ से उसे फिर से व्याख्या करें। उससे सम्बंधित कोई लेख, पुस्तक, रिसर्च आदि जहाँ से भी उपलब्ध हो, उसे निकालें और उस कांसेप्ट के साथ जोड़ कर एक्सप्लेन करें।

#टिप्स 4
फिर उस कॉन्सेप्ट पर निष्कर्ष भी लिखें और आप क्या कहना चाहते हैं, यह स्पष्ट करें। साथ ही कुछ जरुरी तथा तथ्यात्मक लाईनों को जहाँ से लिया गया हो, उसे रेफेरेंस में लिखें।

#टिप्स 5
सबसे पहले आप अच्छा लिखने के चक्कर में ज्यादा समय न गवाएं। सबसे पहला काम है सम्बंधित विषय पर आपकी जैसी समझ है, लिखते जायें। पेज भरते जायें। बाद जब आप लिख लेंगे, तब आपके पास कंटेंट होगा, उसमें आप लगातार एडिट कर सकते हैं, उसमें जोड़ और घटाव कर सकते हैं।

#टिप्स 6
थीसिस का ड्राफ्ट कम्पलीट करना पहली प्राथमिकता में रखें। नए विचारों, गूढ़ बातों आदि के लिए आपको बाद में काम करना चाहिए। आपके पास जब एक ठीक ठाक ड्राफ्ट होगा, तब आप कम चिंता करेंगे, कॉंफिडेंट होंगे तथा यह आपको हड़बड़ी करने अथवा धैर्य खोने की स्थिति से बचाये रखेगा।

#टिप्स 7
यदि आपको कंटेंट आपकी भाषा में नहीं मिल रही ही, तो आप कंटेंट को दुसरे भाषा से लेकर भी गूगल ट्रांसलेशन से अपने रिसर्च की भाषा में अनुवाद कर लें। फिर उसकी भाषा ठीक कर लें। कुछ दूसरी उपलब्ध पुस्तकों से समबन्धित सामग्री जोड़कर व्याख्या करें, निष्कर्ष लिखें तथा सम्बंधित रेफेरेंस जोडें।

#टिप्स 8
आप जिस भी चैप्टर पर लिखना शुरू करें, उससे सम्बंधित पुस्तक, रिसर्च आर्टिकल आदि अपने टेबल पर रख लें। उन्हें पढ़ते जायें और अपनी समझ के साथ साथ लिखते जायें।

#टिप्स 9
इसी प्रकार इन्टरनेट के पेज भी ओपन रख सकते हैं और पढ़कर पहले समझ लें, और अपनी भाषा में लिखें। फिर भाषा ठीक करें, व्याख्या करें, निष्कर्ष दें और आखिर में सन्दर्भ जोडें।

#टिप्स 10
जो चैप्टर आपको समझ में आता है, पहले वही चैप्टर से शुरू करें। कम समझ में आने वाला अथवा मुश्किल लगने वाला चैप्टर बाद में जब आसान चैप्टर लिख लें, तब लिखें।

#टिप्स 11
एक ही बार में बेस्ट लिख देंगे, ऐसी गलतफहमी न रखें। एक बार ड्राफ्ट लिखने के बाद, लगातार प्रयास से उसमें सुधार और गुणवत्ता में बढ़ोतरी आप ज़रूर कर सकते हैं।

#टिप्स 12
प्रत्येक दिन 3-4 पेज लिखने का टारगेट बनायें और रोज उसपर कायम रहे। इसमें थोडा-बहुत कम-बेसी हो सकता है, पर 2 पेज से कम तो कतई समझौता न करें।

#टिप्स 13
प्रत्येक चैप्टर में एक बैलेंस बना कर रखें, एक चैप्टर बहुत लम्बा और और चैप्टर बहुत छोटा बिलकुल न करें। आप पहले ही अन्दाज से तय कर लें कि लगभग कितने पेज में, आपका एक चैप्टर हो जाना है। थोड़ा बहुत ज्यादा कम हो, अथवा किसी चैप्टर में अधिक पेज की जरुरत हो, तो कोई बात नहीं है।

#टिप्स 14
प्रत्येक चैप्टर के लिए लगभग 1 महीना का समय तय कर लें। एक महीने में 30 दिन होते हैं, इस लिहाज से आप प्रतिदिन 3-4 पेज लिखते हैं, तो लगभग 90-120 पेज लिख सकते हैं। यदि आपकी गति मद्धम भी रही और एक दिन में 2 पेज भी लिख पाए, तो 30 दिन में आप 50-60 पेज तो लिख ही पायेंगे।

#टिप्स 15
रोज रूटीन के हिसाब से काम करें। सुबह कितने से कितने बजे के बीच लिखना है, दोपहर और रात में कितने बजे से कितने बजे तक काम करना है। यदि आप एक एक दिन उसपर कायम रहे, तो 1 महीने के आखिर में, आपके पास एक चैप्टर का ड्राफ्ट होगा। एक ध्येय रखें कि जबतक 3-4 पेज लिखेंगे नहीं, सोने का प्रयास नहीं करेंगे।

#टिप्स 16
यदि किसी तथ्य अथवा विचार पर आप बहुत नहीं समझ पा रहे हैं, पर वह बीच में वह आ गया है, आप एकतरह से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, ऐसे में उसे हाईलाइट करके जहाँ का तहां छोड़ दें। उसे बाद में देखा जायेगा। क्या पता अगली बार आसानी से समझ में आ जाये कि क्या करना है। आप इस सम्बन्ध में अपने गाइड अथवा जानकर व्यक्ति से चर्चा कर समझ बना सकते हैं।

#टिप्स 17
जब आप एक चैप्टर पूरा कर लें, तो कमसे कम उसे दो बार पढ़ें और जरुरी हो तो पढ़ने के साथ ही साथ भाषा तथा अन्य गलतियों को सुधारते जायें। फिर उसे प्रिंट करके गाइड के पास ले जायें। उनके साथ बैठकर पढ़कर चर्चा करें। उसके इनपुट को बाद में, शामिल करें।

#टिप्स 18
जो सामग्री नहीं मिले उस सम्बन्ध में जानकार व्यक्ति से सलाह लें, ऐसी पुस्तकालय का दौरा करें, जहाँ सम्बंधित सामग्री मिलने की सम्भावना हो। लेकिन यह काम पी-एच.डी. के पहले एक-डेढ़ साल में ही कर लें। आखिरी समय में, ऐसे भटकना सही समय पर रिसर्च पूरा करने में बाधा बन सकती है।

#टिप्स 19
रेफेरंस किस स्टाइल में लिखना है इसके लिए ज्यादा चिंता न करें, लेकिन रेफेरेंस लिखने के समय जो भी सही स्टाइल आपको समझ में आता है, उसके हिसाब से लिखें। ध्यान रखें कि रेफेरंस में सारी इनफार्मेशन हो, जैसे लेखक का नाम, पुस्तक का नाम, ट्रांसलेटर, प्रकाशन सम्बंधित विवरण, पेज संख्या आदि। यदि कई लेखकों द्वारा एडिटेड बुक हो, तो चैप्टर का टाइटल तथा लेखक भी जरुर लिखें।

#टिप्स 20
जो थीसिस आप लिखें, वह भले ही सेकेंडरी बुक्स अथवा पुरानी बातों का ही संकलन हो, लेकिन उसपर आपकी एक दृष्टिकोण जरुर होनी चाहिए। उसे आप वर्तमान समस्या से कैसे जोड़ते हैं, यह अहम् है। ऐसे में तथ्यों और पुराने विचारों को रखने के बाद आपकी चर्चा और निष्कर्ष में एक नई बात होनो चाहिए। बिना दृष्टिकोण अथवा उद्देश्य के रिसर्च को सराहा जाना मुश्किल है। यह भी देखें कि आपके टॉपिक से वह साम्य रखता है, कि नहीं?

#टिप्स 21
यदि रिसर्च के दौरान आपको कोई नई बात मिलती है, जो आपके थीसिस में चैप्टर के रूप में नहीं है, ऐसे में आप उस बात को थीसिस के आखिर में अनुसूची बनाकर जोड़ सकते हैं।

#टिप्स 22
पी-एच.डी. फोकस्ड स्टडी है। इसलिए लिखने के क्रम में उसे ज्यादा फैलाएं नहीं; उतना ही फैलाएं, जितना आप आसानी से समेट सकें अथवा कनक्लूड कर सकें। नहीं तो, उलझकर परेशान हो सकते हैं, इसका जरुर ध्यान रखें।

#टिप्स 23
कुछ जरुरी संकल्प लेने पड़ेंगे और उनपर कायम रहना पडेगा। उसके बिना थीसिस पूरा होना, मुश्किल हो सकता है। सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, व्हाट्सप्प, ब्लॉग आदि से थोड़ी दुरी बना लें। संभव हो तो दिनभर खोले ही नहीं। दिन में अपना ई-मेल बस एक बार चेक कर लें, वह काफी है। इन्टरनेट में भी, यदि थीसिस के लिए ज़रूरी नहीं हो, तो नेट सर्फिंग और वेबसाइटों पर पढ़ना–लिखना बंद कर दें।

#टिप्स 24
बस लगे रहें! लिखते रहे! पेज संख्या को आगे बढ़ाते रहें! ज्यों-ज्यों ड्राफ्ट में, पेज बढ़ेंगे, सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ेगा, डर और तनाव कम होगा। फिर आप उसे और भी बेहतर तरीके से तथा आत्मविश्वास के साथ लिख पायेंगे।  

#टिप्स 25
आप अपने हेल्थ का भी ध्यान रखें। खाने-पीने में सावधानी बरतें। ऐसा मत खायें, जिससे पेट ख़राब हो। बाहर का खाना, तो बिलकुल नहीं खाएं। वह इसलिए कि एकबार आपकी तबियत ख़राब हो गई, तो सारा रूटीन और शिड्यूल बिगड़ जायेगा। ऐसे में, 3 महीने में थीसिस लिखने का संकल्प टूट सकता है। एक बार संकल्प टूट गया, तो उसे जारी रखने के लिए, फिर नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ेगी।

#टिप्स 26
शरीर को फिट रखने के लिए, ज्यादा कठिन एक्सरसाइज नहीं करें। आप चाहें, तो सुबह शाम टहलने का काम और हलके-फुल्के एक्सरसाइज अथवा योगा कर सकते हैं। ध्यान लगाते हों अथवा विपश्यना करते हों, तो जरुर करें। इससे आप रिलैक्स भी होने, साथ ही साथ आपका थीसिस की तरफ फोकस करने में मदद भी मिलेगी।

#टिप्स 27
कुछ मन्त्र बना लें। उसे बार-बार दुहरायें और उससे प्रेरित होते रहे। मसलन – “चलो आज का कोटा निबटाते हैं”, “एक दिन सिर्फ 4 पेज”, “लेट्स डू इट”,  “लेट्स प्ले विद थीसिस”, “लेट्स राईट इट नाउ”, “लिखो थीसिस लगातार, एडिट करो बार बार” आदि।


    #चेतावनी
लेखक पी-एच.डी. को गुणवत्तापूर्ण तथा नई खोजों को सामने लाने वाला रिसर्च कार्य मानता है और यह लेख सिर्फ उन जैसे शोधार्थियों के लिए हैं, जिनकी थीसिस अटक जाती है। इस लेख को वे लोग फॉलो नहीं करें, जो सही से अपनी पी-एच.डी. कर रहे हैं, और जिनके पास समय अब भी है।